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Thursday, Jul 25, 2024,

Education / University / India / Maharashtra / Wardha
हिंदी विश्वविद्यालय की वशिष्ट वाटिका का शिलापट्ट क्षतिग्रस्त, प्रशासन संवेदनहीन

By  Agcnnnews Team /
Sat/Jun 22, 2024, 09:23 AM - IST -99

  • हाल ही में 22 जनवरी को विश्वविद्यालय में वशिष्ठ वाटिका का उद्दघाटन कर वाटिका का सौंदर्यीकरण किया गया था।
  • भारतीय मनीषियों के नाम पर बनी वशिष्ट वाटिका का शिलापट्ट 3 हफ्ते से छतीग्रस्त पड़ा है।
Wardha/

वर्धा/महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की प्रशासनिक संवेदनहीनता अक्सर चर्चा में रहती है। भारतीय मनीषियों के नाम पर बनी वशिष्ट वाटिका का शिलापट्ट 3 हफ्ते से छतीग्रस्त पड़ा है। संबंधित विभाग की निष्क्रियता है कि संस्थान के मुख्य मार्ग पर स्थित ऋषि वशिष्ट वाटिका के मुख्य द्वार पर प्रतिष्ठित गणमान्यों द्वारा उद्घाटित शिलापट्ट आज टूटा पड़ा है। गौरतलब हो कि इसी मार्ग से विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो के के सिंह और कार्यकारी कुलसचिव डॉ आनंद पाटिल भी रोज गुजरते हैं। विचित्र बात है कि इन अधिकारियों को कैसे नहीं दिखती हैं? तोड़ फोड़ की ऐसी घटनाएं। किसी अज्ञात द्वारा अगर शिलापट्ट को तोड़ गया है तो अब तक उसकी जांच व पुष्टि क्यों नहीं की गई? खेद की बात है की भारतीय संस्कृति के मनीषियों पर विश्वविद्यालय के विद्वान लोग भी उसे ठीक कराने का जिम्मा नहीं उठा पा रहे हैं।  प्रशासनिक अधिकारी विश्वविद्यालय में घटने वाली घटनाओं पर प्रायः चुप्पी साध लेते हैं।

हाल ही में 22 जनवरी को विश्वविद्यालय में वशिष्ठ वाटिका का उद्दघाटन कर वाटिका का सौंदर्यीकरण किया गया था। इस उद्दघाटन समारोह में वर्धा जिला के कलेक्टर और एस. पी. नरुल हसन भी उपस्थित रहे थे। अब वशिष्ट वाटिका के शिलापट को अज्ञात व्यक्ति ने क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के किसी भी प्रशासनिक अधिकारी का ध्यान नहीं जा रहा है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन यदि नया शिलापट नहीं लगवा सकता तो कम से कम उसे ढकवा देना चाहिए। विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि इससे पहले कुलपति रजनीश शुक्ल के कार्यकाल में भी कबीर हिल पर स्थित एक संतों की मूर्तियों को तोड़ा गया था। इस घटना पर भी प्रशासन गोलमोल रहा। छात्र आंदोलन के कारण ही उसका मरम्मत कार्य हो सका। ऐसे में देश के ख्यातिलब्ध व्यक्तियों द्वारा उद्घाटित शिलापट का संरक्षण भी लापरवाही के भरोसे है। मूर्ति तोड़ना या मूर्ति का गायब हो जाना विश्वविद्यालय में नई बात नहीं है। लोगों की अपील है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को ऐसी घटनाओं पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।

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